
टेलीकॉलिंग स्क्रिप्ट हिंदी में — 7 तैयार स्क्रिप्ट्स जो कॉल को मीटिंग में बदलें
Co-Founder, HelloGrowthCRM · June 10, 2026 · 13 min read
Quick Answer
अच्छी टेलीकॉलिंग स्क्रिप्ट के चार हिस्से होते हैं: 10 सेकंड में अपना और कंपनी का परिचय, कॉल का साफ़ कारण, ग्राहक की ज़रूरत समझने वाले 2-3 सवाल, और एक तय अगला कदम (मीटिंग, डेमो या साइट विज़िट)। नीचे 7 तैयार हिंदी स्क्रिप्ट्स दी गई हैं — पहली कोल्ड कॉल, फॉलो-अप, WhatsApp के बाद कॉल, प्राइस ऑब्जेक्शन, 'busy हूँ' का जवाब, पेमेंट रिमाइंडर और रिन्यूअल कॉल — हर एक के साथ 'कब इस्तेमाल करें' नोट।
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अच्छी टेलीकॉलिंग स्क्रिप्ट में क्या होना चाहिए?
स्क्रिप्ट का मकसद रट कर बोलना नहीं है — मकसद है कि हर कॉल में ज़रूरी बातें छूटें नहीं और बातचीत एक तय दिशा में बढ़े। हर अच्छी स्क्रिप्ट में चार चीज़ें होती हैं:
1. पहले 10 सेकंड का परिचय: अपना नाम, कंपनी का नाम और कॉल करने का कारण — बिना घुमाए। ग्राहक के पास समय नहीं है, और भरोसा पहले 10 सेकंड में बनता या टूटता है।
2. कॉल का साफ़ कारण: 'आपने कल हमारी वेबसाइट पर 3BHK के लिए इन्क्वायरी की थी' — ऐसा कारण जो ग्राहक से जुड़ा हो, कंपनी से नहीं।
3. सवाल, भाषण नहीं: 2-3 छोटे सवाल जो ग्राहक की असली ज़रूरत सामने लाएँ। जो टेलीकॉलर पहले 2 मिनट में सिर्फ बोलता है, वह कॉल वहीं हार जाता है।
4. तय अगला कदम: हर कॉल का अंत किसी ठोस चीज़ पर हो — साइट विज़िट की तारीख, डेमो का समय, या अगली कॉल का दिन। 'ठीक है, सोच कर बताइएगा' कोई अगला कदम नहीं है।
नीचे दी गई स्क्रिप्ट्स को अपनी इंडस्ट्री और बोलचाल के हिसाब से बदलें — शब्द आपके अपने होने चाहिए, ढाँचा स्क्रिप्ट का।
स्क्रिप्ट 1: पहली कॉल (कोल्ड कॉल / नई इन्क्वायरी)
कब इस्तेमाल करें: जब किसी नई लीड से पहली बार बात हो रही हो — चाहे इन्क्वायरी वेबसाइट, IndiaMART, JustDial या Facebook से आई हो, या लिस्ट से कोल्ड कॉल हो।
नमस्ते, क्या मेरी बात [ग्राहक का नाम] जी से हो रही है?
जी, मैं [आपका नाम] बोल रहा/रही हूँ [कंपनी] से। आपने [IndiaMART / वेबसाइट / Facebook] पर [प्रोडक्ट/सर्विस] के बारे में इन्क्वायरी की थी — उसी सिलसिले में कॉल किया है। क्या 2 मिनट बात कर सकते हैं?
(अगर हाँ:) धन्यवाद। ताकि मैं आपको सही जानकारी दूँ, बस 2-3 छोटे सवाल — आप यह [प्रोडक्ट/सर्विस] कब तक लेने की सोच रहे हैं? आपका बजट किस रेंज में है? और इस्तेमाल खुद के लिए है या बिज़नेस के लिए?
(जवाबों के बाद:) समझ गया/गई। आपकी ज़रूरत के हिसाब से [1 लाइन में सबसे फिट विकल्प] सबसे सही रहेगा। मैं आपको WhatsApp पर डिटेल्स और प्राइसिंग भेज देता/देती हूँ, और अगर आप कहें तो [दिन] को 15 मिनट का डेमो/विज़िट रख लेते हैं — सुबह ठीक रहेगा या शाम?
(अगर व्यस्त हैं:) कोई बात नहीं, मैं समझ सकता/सकती हूँ। आपके लिए कब सही रहेगा — आज शाम 5 बजे या कल सुबह 11 बजे? मैं उसी समय कॉल करूँगा/करूँगी।
ध्यान दें: दो विकल्प देना ('आज शाम या कल सुबह?') खुला सवाल पूछने ('कब कॉल करूँ?') से कहीं बेहतर काम करता है।
स्क्रिप्ट 2: फॉलो-अप कॉल (जिसने 'सोच कर बताता हूँ' कहा था)
कब इस्तेमाल करें: जब पिछली कॉल, डेमो या विज़िट के बाद ग्राहक ने समय माँगा हो और अब तय तारीख पर दोबारा बात करनी हो।
नमस्ते [नाम] जी, [नाम] बोल रहा/रही हूँ [कंपनी] से। [दिन] को हमारी [प्रोडक्ट/विज़िट/डेमो] पर बात हुई थी और आपने थोड़ा समय माँगा था — इसलिए वादे के मुताबिक कॉल किया।
क्या विचार बन रहा है? और सच बताइए — कोई ऐसी बात है जो रोक रही है? कीमत, टाइमिंग, या कुछ और? (फिर चुप रहें — ग्राहक को बोलने दें।)
(अगर 'सोच रहा हूँ' दोहराएँ:) बिल्कुल, सोचना चाहिए। बस यह बता दीजिए कि किस बात पर सोच रहे हैं — कीमत, फीचर, या टाइमिंग? उसी की जानकारी और भेज देता/देती हूँ। (असली ऑब्जेक्शन बाहर आ जाएगा।)
(अगर टाइमिंग रोक रही है:) समझ गया/गई। तो ऐसा करते हैं — मैं [तय तारीख] को कॉल करता/करती हूँ। तब तक WhatsApp पर [केस स्टडी/ब्रोशर] भेज रहा/रही हूँ, 2 मिनट में देख लीजिएगा।
(अगर जवाब टालू है:) [नाम] जी, मैं आपका समय बर्बाद नहीं करना चाहता/चाहती। अगर यह अभी आपकी प्राथमिकता नहीं है, तो साफ़ कह दीजिए — मैं 3 महीने बाद संपर्क करूँगा/करूँगी। और अगर इंटरेस्ट है, तो अगला कदम तय कर लेते हैं। आपके लिए क्या सही है?
फॉलो-अप का नियम: हर कॉल के अंत में अगली कॉल की तारीख तय हो, और वह तारीख CRM में रिमाइंडर के साथ दर्ज हो। याददाश्त पर चलने वाला फॉलो-अप हमेशा छूटता है।
स्क्रिप्ट 3: WhatsApp भेजने के बाद की कॉल
कब इस्तेमाल करें: जब आपने ग्राहक को WhatsApp पर ब्रोशर, प्राइस लिस्ट या डिटेल्स भेजी हों — मैसेज देखा गया हो लेकिन जवाब न आया हो। मैसेज भेजने के अगले 24 घंटे के भीतर कॉल करना सबसे अच्छा रहता है।
नमस्ते [नाम] जी, [नाम] बोल रहा/रही हूँ [कंपनी] से। कल आपको WhatsApp पर [ब्रोशर/प्राइस लिस्ट/डिटेल्स] भेजी थीं — देखने का मौका मिला?
(अगर हाँ:) बढ़िया! उसमें कौन-सी बात आपको सबसे काम की लगी? और कोई सवाल जो मैं अभी 1 मिनट में क्लियर कर दूँ?
(अगर नहीं:) कोई बात नहीं, मैं 1 मिनट में सबसे ज़रूरी बात बता देता/देती हूँ — [1 लाइन में सबसे बड़ा फायदा]। बाकी डिटेल्स मैसेज में हैं, आराम से देख लीजिएगा।
(अंत में:) तो ऐसा करते हैं — [दिन] को 15 मिनट का [डेमो/विज़िट/मीटिंग] रख लेते हैं, वहीं सारे सवाल एक साथ हल हो जाएँगे। सुबह ठीक रहेगा या शाम?
याद रखें: WhatsApp पर भेजकर चुप बैठ जाना टेलीकॉलिंग की सबसे आम गलती है। मैसेज कॉल का अंत नहीं, अगली कॉल की नींव है। अगर आपका CRM WhatsApp इंटीग्रेशन वाला है — जैसे HelloGrowthCRM, जिसमें हर मैसेज उसी लीड की टाइमलाइन में दिखता है — तो कॉल से पहले एक नज़र में दिख जाता है कि ग्राहक ने क्या देखा और क्या पूछा था।
स्क्रिप्ट 4: प्राइस ऑब्जेक्शन — 'महंगा है'
कब इस्तेमाल करें: जब ग्राहक कीमत सुनकर रुक जाए, 'बजट से बाहर है' कहे, या किसी सस्ते विकल्प से तुलना करे।
(पहला कदम — डिफेंड नहीं, सवाल:) समझ सकता/सकती हूँ [नाम] जी, कीमत ज़रूरी चीज़ है। एक बात पूछूँ — आप किससे तुलना कर रहे हैं? (चुप रहें और सुनें — जवाब से पता चलेगा कि तुलना किसी और प्रोडक्ट से है, या बजट ही सीमित है।)
(अगर तुलना किसी और से है:) अच्छा विकल्प है वह भी। फर्क सिर्फ इतना है — [1 ठोस फर्क जो ग्राहक की बताई ज़रूरत से जुड़ा हो]। आपने जो ज़रूरत बताई थी, उसके लिए यही हिस्सा सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
(फिर कीमत को छोटा करें:) और अगर पूरे महीने के हिसाब से देखें, तो यह रोज़ की एक चाय जितने खर्च वाली बात है — बदले में [ठोस नतीजा: कोई लीड न छूटे / फॉलो-अप अपने-आप चले / पूरा हिसाब एक जगह]।
(अगर बजट ही मुद्दा है:) साफ़ बताने के लिए धन्यवाद। आपका बजट क्या है? उस रेंज में [छोटा प्लान / पेमेंट टर्म्स / शुरुआती पैकेज] से शुरुआत हो सकती है — जब नतीजा दिखे, तब अपग्रेड कर लीजिएगा। यह आपके बजट में बैठेगा?
याद रखें: कीमत का ऑब्जेक्शन असल में वैल्यू का सवाल है। जब तक ग्राहक को फायदा साफ़ नहीं दिखता, हर कीमत महंगी लगती है।
स्क्रिप्ट 5: 'अभी busy हूँ' का जवाब
कब इस्तेमाल करें: जब ग्राहक कॉल की शुरुआत में ही कहे — 'busy हूँ', 'मीटिंग में हूँ', 'बाद में कॉल करना'।
(पहला जवाब — दबाव नहीं, सम्मान:) बिल्कुल [नाम] जी, आपका समय कीमती है। सिर्फ 30 सेकंड लूँगा/लूँगी — [1 लाइन में कॉल का कारण और सबसे बड़ा फायदा]। अगर काम की बात लगे, तो पूरी बात के लिए आराम से समय तय कर लेते हैं।
(फिर दो विकल्प दें:) आज शाम 5 बजे ठीक रहेगा या कल सुबह 11 बजे? (दो विकल्प देना 'कब कॉल करूँ?' पूछने से कहीं बेहतर काम करता है — ग्राहक के लिए चुनना आसान हो जाता है।)
(अगर फिर भी मना करें:) कोई बात नहीं। मैं WhatsApp पर 2 लाइन का मैसेज भेज देता/देती हूँ — फ्री होकर देख लीजिएगा। और [दिन] को एक छोटा-सा कॉल करूँगा/करूँगी। धन्यवाद [नाम] जी!
सबसे ज़रूरी बात: जो समय ग्राहक ने दिया है, ठीक उसी समय कॉल करें — एक मिनट भी आगे-पीछे नहीं। 'busy हूँ' कहने वाला ग्राहक अक्सर मना नहीं कर रहा होता, सिर्फ गलत समय पर पकड़ा गया होता है। कॉल-बैक का समय CRM रिमाइंडर में दर्ज करें, याददाश्त पर न छोड़ें।
स्क्रिप्ट 6: पेमेंट रिमाइंडर कॉल
कब इस्तेमाल करें: जब इनवॉइस की ड्यू डेट नज़दीक हो या निकल चुकी हो। लहजा मदद करने वाला रखें, वसूली वाला नहीं — मकसद है पैसा भी आए और रिश्ता भी बना रहे।
नमस्ते [नाम] जी, [कंपनी] से [नाम] बोल रहा/रही हूँ। उम्मीद है [प्रोडक्ट/सर्विस] से सब बढ़िया चल रहा है। एक छोटी-सी बात के लिए कॉल किया — आपकी इनवॉइस [नंबर] की पेमेंट [तारीख] को ड्यू थी। क्या कोई दिक्कत आ रही है जिसमें मैं मदद कर सकूँ?
(अगर 'प्रोसेस में है':) बहुत बढ़िया, धन्यवाद। लगभग कब तक हो जाएगी, ताकि मैं अपनी तरफ नोट कर लूँ? (तारीख मिलते ही CRM में दर्ज करें।)
(अगर कोई दिक्कत है:) समझ गया/गई, बताने के लिए धन्यवाद। ऐसा करते हैं — [विकल्प: आंशिक पेमेंट / नई तारीख / आसान किस्तें]। तो [तारीख] पक्की रही?
(अंत में:) मैं पेमेंट लिंक अभी WhatsApp पर भेज देता/देती हूँ — वहीं से 2 मिनट में हो जाएगी, और रसीद भी उसी पर आ जाएगी।
याद रखें: पेमेंट रिमाइंडर में गुस्सा या ताना कभी काम नहीं करता। ड्यू डेट से पहले एक विनम्र रिमाइंडर — WhatsApp मैसेज + कॉल — ज़्यादातर देरी होने से पहले ही रोक देता है। यह सीक्वेंस CRM से अपने-आप चलाया जा सकता है।
स्क्रिप्ट 7: रिन्यूअल कॉल (पॉलिसी, AMC, सब्सक्रिप्शन)
कब इस्तेमाल करें: जब ग्राहक की पॉलिसी, AMC, सब्सक्रिप्शन या सर्विस प्लान की रिन्यूअल डेट नज़दीक हो — आखिरी दिन का इंतज़ार बिल्कुल न करें।
नमस्ते [नाम] जी, मैं [नाम], [कंपनी] से बोल रहा/रही हूँ। आपकी [पॉलिसी/सर्विस/सब्सक्रिप्शन] [तारीख] को रिन्यू होनी है — उसी के लिए कॉल किया है ताकि आखिरी दिन की भागदौड़ न हो।
पिछले साल वाला ही प्लान जारी रखना चाहेंगे, या इस बार ज़रूरतें रिव्यू कर लें? कई बार थोड़ा-सा बदलाव करके प्लान काफ़ी बेहतर बैठ जाता है — 5 मिनट में आपको तुलना समझा सकता/सकती हूँ।
(अगर ग्राहक टालें:) बिल्कुल, अभी समय नहीं है तो कोई बात नहीं। बस एक बात का ध्यान रखें — [तारीख] के बाद [प्लान लैप्स होने / सर्विस रुकने / बोनस छूटने] का नुकसान होगा। मैं WhatsApp पर रिन्यूअल लिंक और तुलना भेज देता/देती हूँ, और परसों एक छोटा-सा रिमाइंडर कॉल कर लूँगा/लूँगी। ठीक रहेगा?
(पेमेंट के लिए तैयार हों:) बहुत बढ़िया। लिंक अभी WhatsApp पर आ जाएगा — पेमेंट होते ही कन्फर्मेशन भी वहीं मिल जाएगा। कोई सवाल हो तो इसी नंबर पर मैसेज कर दीजिएगा।
रिन्यूअल कॉल्स में सबसे बड़ी गलती है सिर्फ एक कॉल करना। रिन्यूअल डेट से काफ़ी पहले शुरू होने वाला रिमाइंडर सीक्वेंस — कॉल + WhatsApp, कुछ हफ्ते पहले से — रिन्यूअल रेट को साफ़ तौर पर बेहतर करता है। यही सीक्वेंस CRM से अपने-आप चल सकता है।
टेलीकॉलिंग के Do's & Don'ts
ये करें (Do's):
1. नाम लेकर बात करें — 'सर/मैडम' की जगह '[नाम] जी' से बातचीत तुरंत निजी बन जाती है।
2. अनुमति लें — 'क्या 2 मिनट बात कर सकते हैं?' पूछने से इनकार कम होते हैं, ज़्यादा नहीं।
3. बोलने से ज़्यादा सुनें — ग्राहक की बताई ज़रूरत ही आपकी अगली लाइन तय करे, स्क्रिप्ट नहीं।
4. हर कॉल का नतीजा तुरंत CRM में दर्ज करें — नतीजा, नोट और अगली तारीख। यही अगली कॉल की तैयारी है।
5. कॉल + WhatsApp साथ चलाएँ — कॉल पर बात, WhatsApp पर सबूत (ब्रोशर, प्राइस, लिंक)। दोनों मिलकर ही भरोसा बनाते हैं।
6. वादे का समय निभाएँ — जिस दिन-समय पर कॉल-बैक कहा है, ठीक उसी समय करें।
ये न करें (Don'ts):
1. रटी हुई स्क्रिप्ट मशीन की तरह न पढ़ें — ग्राहक तुरंत पकड़ लेता है और भरोसा टूट जाता है।
2. ग्राहक को बीच में न काटें — पूरी बात सुनने के बाद ही जवाब दें।
3. झूठे दावे या फर्ज़ी ऑफर न दें — एक झूठ पूरे ब्रांड की साख ले डूबता है।
4. बिना अगला कदम तय किए कॉल खत्म न करें — 'ठीक है, सोच कर बताइएगा' पर खत्म हुई कॉल बेकार गई कॉल है।
5. एक ही दिन में बार-बार कॉल करके परेशान न करें — फॉलो-अप और पीछा करने में फर्क होता है।
6. गलत समय पर कॉल न करें — बहुत सुबह, देर रात या ग्राहक के बताए 'नहीं' वाले समय पर कॉल रिश्ता खराब करती है।
कॉल करने का सही समय क्या है?
इस सवाल का कोई एक जादुई जवाब नहीं है — सही समय आपकी इंडस्ट्री, ग्राहक के काम-काज और शहर पर निर्भर करता है। लेकिन कुछ सामान्य बातें ज़्यादातर टीमों पर लागू होती हैं:
B2B (बिज़नेस ग्राहक): कामकाजी घंटों में कॉल करें, लेकिन दिन की शुरुआत की भागदौड़ और मीटिंग-भरे समय से बचें। सुबह की शुरुआती व्यस्तता निपट जाने के बाद और लंच के कुछ देर बाद का समय अक्सर बातचीत के लिए बेहतर रहता है।
B2C (आम ग्राहक): नौकरीपेशा लोग ऑफिस के घंटों में खुलकर बात नहीं कर पाते — शाम का समय और छुट्टी के दिन अक्सर बेहतर काम करते हैं। गृहिणियों और दुकानदारों के लिए दिन का पैटर्न अलग होता है।
नई इन्क्वायरी: यहाँ नियम सबसे साफ़ है — जितनी जल्दी, उतना अच्छा। इन्क्वायरी आने के कुछ मिनटों के भीतर की गई कॉल पर ग्राहक का इंटरेस्ट सबसे ताज़ा होता है।
सबसे भरोसेमंद तरीका: अंदाज़े की जगह अपना डेटा देखें। CRM की कॉल रिपोर्ट में कुछ ही हफ्तों में दिख जाता है कि आपकी इंडस्ट्री में किस समय की कॉल्स पर सबसे ज़्यादा बातचीत होती है — फिर टीम का डायलिंग शेड्यूल उसी हिसाब से बनाएँ। हर बंद हुई कॉल का समय और नतीजा दर्ज होता रहे, तो यह जवाब आपका अपना डेटा दे देता है।
स्क्रिप्ट से सिस्टम तक: टेलीकॉलिंग टीम को कैसे स्केल करें
अच्छी स्क्रिप्ट अकेले काफ़ी नहीं है। कुछ टेलीकॉलर्स की टीम भी दिन में सैकड़ों कॉल करती है — बिना सिस्टम के यह बताना नामुमकिन है कि कौन-सी लीड पर क्या बात हुई और अगला फॉलो-अप कब है। डायरी और एक्सेल यहीं फेल होते हैं।
सिस्टम का मतलब है: हर इन्क्वायरी (IndiaMART, JustDial, वेबसाइट, Facebook) अपने-आप CRM में लीड बने; हर कॉल ऑटो-लॉग हो; हर कॉल के अंत में अगला कदम और तारीख दर्ज हो; और WhatsApp फॉलो-अप उसी रिकॉर्ड से जाए। मैनेजर को डैशबोर्ड पर दिखे कि किस टेलीकॉलर की कितनी बातचीत हुई और कौन-सी लीड्स ठंडी पड़ रही हैं।
HelloGrowthCRM ठीक यही करता है — बिल्ट-इन डायलर से एक क्लिक में कॉल, ऑटोमैटिक कॉल लॉगिंग और कॉल रिकॉर्डिंग (जिससे टीम लीड असली कॉल्स सुनकर स्क्रिप्ट सुधार सकता है), WhatsApp सीक्वेंस जो तय समय पर अपने-आप जाते हैं, और लीड स्कोरिंग जो बताती है कि आज सबसे पहले किसे कॉल करना है। फ्री प्लान से शुरुआत की जा सकती है — बिना क्रेडिट कार्ड के।
शुरुआत सरल रखें: ऊपर की 7 स्क्रिप्ट्स को अपनी भाषा में ढालें, टीम के साथ रोल-प्ले करें, और हर कॉल का नतीजा CRM में दर्ज करने की आदत बनाएँ। कुछ ही हफ्तों में फर्क दिखेगा — कॉल उतनी ही होंगी, लेकिन मीटिंग और सौदे ज़्यादा निकलेंगे।
Frequently Asked Questions
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Rushabh Shah is co-founder of Soor LLC and leads product strategy at HelloGrowthCRM. He has worked with hundreds of small business sales teams to design CRM workflows that improve pipeline predictability and reduce operational overhead.

